×
ब्लॉग पढ़े
ऑडियो सुने
वीडियो देखे
इमेज देखे
कोट्स पढ़े
लॉगिन करे
× IMAGES QUOTES BLOGS CONTACT ME FOLLOW ME
 
BLOG LIST
   
Google Ads



Member Logo Frog Share
मुझे फॉलो करे।
Tulsi vivah क्यों किया जाता है।

आज हम जानेगे Tulsi Vivah के पीछे की वास्तविकता के बारे में। 

तुलसी पौधा पूर्व जन्म मे एक लड़की थी। जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था। बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी।

बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी। जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया।

tulsi vivah

जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था। वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी। सदा अपने पति की सेवा किया करती थी। एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ। जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे। तो वृंदा ने कहा-

स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है। आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प नही छोडूगी।

जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।


सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है। में उसके साथ छल नहीं कर सकता । फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।

भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा। जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है। तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?

 tulsi mata

उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये। पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।

सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे सती हो गयी। उनकी राख से एक पौधा निकला तब भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से इनका नाम तुलसी है,

और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा। जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में बिना तुलसी जी के भोग स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे और Tulsi Vivah शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में किया जाता है। देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !

इस कथा को कम से कम दो लोगों को अवश्य सुनाए आप को पुण्य अवश्य मिलेगा।



 563 Views Feb 29, 2020 
0
Share
0
Comment
0
Like
×
 
 
0 0
Google Ads
इन ब्लॉग को भी पड़ना मत भूलियेगा।
member Logo Frog Share
मुझे फॉलो करे।
चूहों को कुतरने की आदत क्यों है ?
#रहस्यमयी बाते
चूहों
  4 ने देखा Dec 02, 2021  
ब्लॉग पढ़ने के लिए क्लिक करे।
member Logo Frog Share
मुझे फॉलो करे।
संत ने कुए के पानी की दुर्गन्ध को कैसे दूर किया?
#भक्ति एवं धर्म
संत
  213 ने देखा May 23, 2021  
ब्लॉग पढ़ने के लिए क्लिक करे।
member Logo Frog Share
मुझे फॉलो करे।
क्षण भर में कैसे ज्ञान को प्राप्त हुआ एक फ़क़ीर।
#भक्ति एवं धर्म
क्षण
  372 ने देखा May 23, 2021  
ब्लॉग पढ़ने के लिए क्लिक करे।
 
 
 
 
 
CATEGORY LIST
Sad Quotes
Trust Quotes
स्वास्थ्य विज्ञान
Karma Quotes
Gd 9T Images
रहस्यमयी बाते
Holi Images
Lion Images
15 August Images
Valentines Images
×
कुछ मन पसंद का अपलोड करे ।
ऑडियो इमेज कोट्स ब्लॉग
Thank for Like
Download File Successfully
You Follow
Your report submit Successfully
Login First
You Successfully Unfollow
Copy Text Successfully