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कुंडलिनी शक्ति परमाणु शक्ति के समान है जरा संभल के इसे जगाना।

योग के अभ्यास से हम कुंडलिनी को जागृत कर सकते है। यह करना बहुत कठिन बात नही। शास्त्रो में कुंडलिनी को सांप का प्रतिक माना जाता है। जैसे सांप जब सोई अवस्था में होता है। तब उसका कुछ पता नही लगता। और जब जाग जाता है। तो काफी भयानक रूप ले लेता है। वैसे ही हमारी कुंडलिनी शक्ति है। जब कुंडलिनी सोई होती है। जो की अक्सर लोगो की सोई हुई है। तो इस कारण से हमे इसकी शक्ति का भान नही।

परंतु जब यह जग जायेगी। तब हमे इसकी शक्ति का पता लगता है। तब हमे एहसास होता है। की हमारे अंदर इतनी ऊर्जा समायी हुई है। इसके जागृत होते ही। आपके अंदर बहुत सारी चमत्कारी चीजे घटित होने लगती है। जिसकी अपने कभी कल्पना तक नही की होगी। हमारी कुंडलिनी शक्ति एक प्रकार की परमाणु शक्ति की तरह होती है।

जब तक इस पर प्रहार न किया जाये।तब तक इसकी शक्ति के बारे में अनुमान लगाना संभव नही। जैसे की एक छोटे से परमाणु में इतनी शक्ति होती है। की वो पूरी दुनिया की कुछ ही क्षण में तबाह कर सकती है। तो आप इससे कुंडलिनी शक्ति का अनुमान लगा सकते हो। कुछ योग क्रियाओ से कुंडलिनी शक्ति को जगाना बहुत ही आसान है। पर आपने कभी सोचा है। की इतनी बड़ी ऊर्जा को जगाना आपके लिए कितने खतरे की बात है।

क्योकि इतनी शक्ति को सँभालने के लिए आपके पास वैसा शरीर भी होना चाहिए। इसलिए शॉर्टकट अपनाना नही चाहिए। धीरे धीरे Step By Step ही आपको चलना चाहिए। जिससे पहले आपका शरीर उस ऊर्जा को सँभालने में सक्षम होगा। और तभी आप उस ऊर्जा को उपयोग में ला सकते हो


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