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ब्रह्माण्डीय ऊर्जा और हमारे शरीर की ऊर्जा में गहरा ताल मेल है।

आपके शरीर की ऊर्जा का जन्म कहा से होता है।

Yoga Nidra के बारे में जानते है।

Yoga Nidra क्या है।

योगनिद्रा एक बहुत ही अनोखी विधि है। जिसके द्वारा सरलता से अपनी समस्त चिंताओं से मुक्त हो सकते हो। योग की सारी क्रियाएँ हम जागृत अवस्था में करते है। लेकिन योगनिंद्रा इकलोती ऐसी क्रिया है। जिसे हम लेट के कर सकते है। योगनिद्रा में आप पूर्ण होश में होते हुए भी शरीर और मन पर गहरी नींद के तमाम लक्षण अनुभव कर पाते हैं।

योग निद्रा वह नींद है, जिसमें हम जागते हुए भी सोने की स्टेज में पहुंच जाते है। सोने व जागने के बीच की स्थिति ही योग निद्रा है । इसे स्वप्न और जाग्रत के बीच ही स्थिति मान सकते हैं। यह एक झपकी जेसी है या कहें कि अर्धचेतन अवस्था जैसा है। अपने नाटको और फिल्मो में देखा होगा की भगवान विष्णु इसी निद्रा में सोते हैं। तो चलिए शुरू करते है।

योग निद्रा 10 मिनट से 45 मिनट तक की जा सकती है।

सावधानी : योग निद्रा के लिए खुली जगह होनी चाहिए। अपनी सांसो के आवा गमन पर ध्यान केंद्रित करना। योग निद्रा के छह चरण है।

 yoga nidra

प्रथम चरण में : एक स्वच्छ स्थान पर दरी या चटाई बिछाकर उस पर शव आसन में लेट जाये। आरामदायक कपडे पहने। जमीन पर दोनों पैर लगभग एक फुट की दूरी पर हों। हथेली कमर से छह इंच दूरी पर हो और आंखे बंद रखें।

द्वितीय चरण में : इसके बाद पुरे शरीर को स्थिल करने की कोशिश कीजिए । अपने मन-मस्तिष्क को सुझाव दीजिए की में शांत हो रहा हु। इस दौरान अपनी सांस पर ध्यान रखें।

तृतीय चरण में : अब कल्पना करें कि आप के शरीर के सारे अंग शिथिल हो गए हैं। तब फिर स्वयं से मन ही मन कहें कि मैं योग निद्रा का अभ्यास करने जा रहा हूं। ऐसा तीन बार दोहराएं और गहरी सांस छोड़ना तथा लेना जारी रखें।

चतुर्थ चरण : अब, अपने मन को शरीर के विभिन्न अंगों पर ले जाइए और उन्हें शिथिल व तनाव रहित होने का निर्देश दें। पूरे शरीर को शांतिमय स्थिति में रखें। महसूस करें की संपूर्ण शरीर से दर्द और पीड़ा बाहर निकल रही है और मैं आनंदित महसूस कर रहा हूं। गहरी सांस ले।

yoga nidra

पंचम चरण में : फिर अपने मन को शरीर के दाहिने हिस्से पर ले जाइए। पांव की अंगुली से लेकर सिर तक सभी दाहिने अंगो को सिथिल होने का आदेश दे।

षष्टम चरण में : इसी तरह शरीर के बाय अंगो को भी शिथिल करें। Normal सांस लें व छोड़ें। अब लेटे-लेटे पांच बार पूरी सांस लें व छोड़ें। साँस इतनी गहरी हो की बह आपके पेट को छूकर बापिस आये।



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