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आप अपने विचार के माध्यम से बस्तुओं को हिला सकते हो।

आप अपने विचार के माध्यम से बस्तुओं को हिला Telekinesis सकते हो। अगर आपको विश्वास नही हो रहा तो। एक छोटा सा प्रयोग करना। एक बंद कमरे में जहा हवा ना चल रही हो। एक पानी का बर्तन लेना और उस पर एक हलकी बस्तु रखे जो की पानी में ना डूबे। उसके ऊपर तैरती रहे।

उसके बाद आपको उस बस्तु पर अपनी आँखे गड़ाये रखनी है। करीब 5 Minute आँखे गड़ाये रखने के बाद और अपने मन में ही। उसको दाये या बाये घूमने को कहना है। आपका मन जितना एकाग्र होगा। उतनी जल्दी ही परिणाम आपके सामने आयेगा । बस आपको थोडा धैर्य और एकाग्रता बढ़ाने की जरूरत है।

telekinesis

अगर आपका विचार एक छोटी सी बस्तु को हिला सकता है। तो थोडा सा ध्यान होर लगाने पर आप भारी चीजो को भी आसानी से हिला सकते है। हमारे विचार की तरंग पदार्थ को छूती और रूपांतरित करती है। इसलिए दुनिया में ऐसे भी लोग है। अगर आप अपने या किसी परिजन के कपडे के टुकड़े को उसे दोंगे।

तो वः ब्यक्ति आपके ब्यक्तित्व के सम्बन्ध में उतनी ही बाते बता सकता है। जितना आपको भी अपने बारे में ना पता है। क्योकि आपके कपडे का टुकड़ा आपके विचार की तरंगो को सोख लेता है।

आपके शरीर पर पहनी सारी बस्तुए आपके विचारो को सोख लेती है। तभी तो कहा जाता है। की किसी दूसरे का कपडा नही पहनना चाहिए। हमारे विचार की तरंगे इतनी शुक्षम है। की अगर हजारो साल पहले किसी ब्यक्ति का पहना कुछ भी मिल जाये। उससे हम उस ब्यक्ति के सवभाव के बारे में बता सकते है।

telekinesis power

इसी कारण से कब्रे, और समाधिया बनानी शुरू की थी। इसलिए भारत में हम महान संतो के शरीर को नही जलाते। उनकी कब्रे बनाई जाती है। क्योकि मरने के बाद भी महान संतो का शरीर। हजारो सालो तक अपने विचारो की तरंगो को बाहर फेंकता रहता है। बिचार की अनंत सम्भावनाये है।

जब आप एक बिचार को सोचते है। तो बहुत ध्यान रख कर सोचना चाहिए। क्योकि उस विचार की तरंगे आपके साथ पूरी जिंदगी रहेगी। विचार की तरंगे बहुत सूक्षम है। तभी तो विज्ञानिको का ख्याल है। की अगर जीसस, या कृष्ण जैसे महान ब्यक्ति इस दुनिया में हुए है।

तो आज नही तो कल हम उनकी बिचार की तरंगो को पकड़ने में समर्थ हो जायेगे। और इससे तय होगा की क्या सच में आज के गीता सम्बाद और कृष्ण के कहे हुए सम्बाद में कोई अन्तर है या नही। क्योकि गीता के शब्द आज भी कहि ना कहि दुनिया में होंगे।

जो विचार कभी बोले गए है। वो आज भी कहि दूर जगत के किसी किनारे में मिलेगे। उनको सुना जा सकता है। बिचार हमारे भौतिक जगत को बहुत प्रभावित करते है। जैसे की अगर किसी पोधे के पास कुरूप संगीत लगाया जाये तो वो मुरझा जायेगा।

वो कभी भी पूर्ण विकसित नही हो सकता। गाय के सामने विशेष प्रकार का संगीत लगाया जाये तो वो जादा धुंध देती है। हर आदमी अपने विचार का जगत अपने साथ लेकर चल रहा है। तभी तो जेसे ब्यक्ति के बिचार होते है। बैसा ही उसके साथ होता है।



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